Friday, 28 March 2014

!! आखिरी अफसाना !! (कहानी)



मन के भी ना जाने कितने तार होते है, किसी ट्राँजिस्टर के पतले तार की बुनावट की तरह असंख्य तारो से बुना होता है, जहाँ न जाने कौन से तार का कहाँ कनेक्शन लगा होता है, और कभी-कभी कोई एक तार बिजली के करेंट से भी अधिक कंपन पैदा कर देती है।
उम्र अपनी गति से बढ रही है और वक़्त अपने रफ्तार के साथ बढ़ते जा रहे है। ऐसा लग रहा है मानो बंद मुठ्ठी मे रेत की तरह फिसल रही है और हम अपनी जगह खड़े होकर.......!! कल तक ड्राइंग रूम में रखे आईने में कूद कर अपना चेहरा देखता था, और आज अचानक जब टाई  सही करने के लिए झुक कर खड़ा हुआ, ऐसा लगा मानो किसी ने नींद से जगा दिया हो मुझे। बड़े बड़े सपनो और ख्वाइशों में तैरता हुआ कब, नदी के इस छोर से उस छोर आ गया, पता ही नहीं चला। और कभी हसरतों को समझ पाने और कभी हसरतों को समझाने की उधेरबुन में, ऐसे ही एक रात मेरे साथ एक खुबसुरत हादसा हुआ मै सोने की कोशिश कर रहा था कि अचानक मोबाईल में एक मैसेज फ्लेश हुआ,
It must be raining season but it’s not rain, when you born, its sky who is crying becoz they lost his most beautiful star and that’s you. So, Happy Birthday.
Time: 23:59:00,
SENDER: UNKNOWN

मै उठकर घड़ी देखा तो रात के बारह बज रहे थे, मुझे लगा जैसे किसी ने झकझोड़ कर उठा दिया हो....... !! ऐसा लगा जैसे जून की दोपहरी में घनी झाड़ियों ने अपने शीतल छाँव मे मुझे समा लिया हो । मै उस नंबर पर फोन करने की कोशिश किया लेकिन दूसरी तरफ से काट दिया गया और फिर से एक मैसेज फ्लैश हुआ, “इतनी भी जल्दी क्या है हमने आपको जमाने में ढुँढकर निकाला और आप बैठे-बिठायें सबकुछ जान लेना चाहते है??” अब मुझे अरसे बाद अचानक सब कुछ सतरंगी सपनो की तरह लगने लगा। मैने हिम्मत करके मैसेज भेजा, “हू आर यू??” जवाब आया, “ जस्ट गेस, माई नेम हैव फाइव लेटर वर्ड, व्हीच इज स्टार्ट फ्राम कोनसोनेंट एंड एंड ऑफ द भाँववेल.....      
मैने गर्ल नेमिंग चाइल्डकी सूची मे ढुंढने की कोशिश किया पर सभी नाम एक जैसे लगा। फिर मै अपने दिनचर्या को याद करने लगा, दरअसल मुझे विश्वास था कि उसी मे से हो सकता है कुछ अनछुए पहलू हो जो किसी साया की तरह मेरा पीछा कर रही हो। मैं अपने हर एक उस वाकये को किसी पुराने किताब की तरह खंगालने लगा!

बोर्डिंग के बाद घर, फिर कॉलेज, कॉलेज के बाद नौकरी ! कहीं ये वो तो नही जो कॉलेज मे मिली थी, फिर लगता नही-नही उसने तो कॉलेज छोड़ने के बाद मुझसे बात भी नही की! और कॉलेज में इश्क का सफ़ल होना राजस्थान में गन्ने की पैदावार जैसा है। हो जाए तो गज़ब मीठा, न हो तो खुद को और प्रकृति को कोसते रहिये।  ....................!!! फिर मै एक-एक कर अपने उन स्मृतियों को दोहराने लगा, जैसे कि यह बात मैने किससे कही थी कि, ‘जब तुम चलती हो तो तुम्हारे बाल तुम्हारे चेहरे की बायी तरफ को कभी पीओके’ (पाक अक्यूपाईड काश्मीर) तो दायी तरफ को सीओके’ ( चाईना अक्यूपाईड काश्मीर) बना देती है और उस दिन जब तुम मॉल मे अपने सहेलियों के साथ जा रही थी तो मै तुम्हे उस भीड़ में तुम्हारे बालों से ही पहचानने की कोशिश किया था और वह तुम ही थी। या फिर किससे यह कहा था कि, ‘होठों पर तुम्हारे  तिल तौबा, मेरा लूट कर ले गई दिल तौबा’। फिर मै पलटते हुए कहता, अरे मै तो मजाक कर रहा था हिन्दी सिनेमा नही देखती हो क्या....... !! हालाँकि दौनो ही बातें सही होती थी, होठो पर तिल भी और हिन्दी सिनेमा का गीत भी........... !!       
जाने कितने ऐसे वाकये, अनगिनत चेहरें मेरे स्मृति पटल पर घुमने लगे और एक अंजान चेहरा अपनी आकार बनाता गया। अनायास ही मुझे ‘LUCY’ की याद आ गई, जो बचपन में अंग्रेजी की किताब मे एक कविता थी उस कविता में ‘LUCY’ एक अदृश्य नायिका थी, जिससे नायक प्यार करता था। अदृश्य की अपनी आजादी होती है, अपना विन्यास होता है, जैसे-जैसे चाहा वैसा बना दिया। और खुश होने के लिए आँखे बन्द कर लेता था । अब मै बिल्कुल सजग रहने लगा जैसे कोई सीसीटीवी मेरा पीछा कर रहा हो जब मै आगे चलता तब दो आँखे मेरे पीछे भी लगी रहती थी और दो आँखे गली के किनारे बनी बहुमंजिला इमारत की बालकनी में बार-बार चली जाती । मै कई दिनों तक ‘LUCY’ की आड़ी-तिरछी तस्वीर अपने मन मे बनाता रहा, अब मोबाइल मेरे जीवन की सबसे अनमोल चीज हो गई, मोबाइल मे मेरे प्राण बस बसने लगा, ठीक वैसे ही जैसे किसी दंत कथा मे आदमी का प्राण तोता मे बसता था!! सुरज ढलते ही सुनहरी शाम का मुझे इंतजार रहने लगा और हर एक शाम मेरे लिए एक नया सवेरा लाता !!
मोबाइल का हर एक बीप मेरे दिल के धड़कन की तरह आवाज करता था। जब कभी मन बैचेन हो उठता तब फोन करता और पहली घंटी बजते ही उधर से काट दिया जाता, “नहीं, एक नदी के दो किनारे है हम, ना तो कभी मिल सकते है और ना कभी कोशिश करना, ओनली मैसेज अलाव !! जैसे मैने किसी पाकिस्तानी सीमा में घुसपैठ कर दी हो और सीमा से वापसी के आदेश आ गये हो। हम अपने-अपने पसंद-नापसंद जैसे ‘समाज, सिनेमा, चेतन भगत के उपन्यास खासकर ‘थ्री मिस्टेक ऑफ माइ लाइफ’ आदि पर घंटो मैसेज करते रहते थी, वो सवाल की झड़ी लगा देती थी जैसे कि, क्यों  चेतन भगत अपनी किताब को सफल बनाने में हमेशा एक रिश्ते की बलि देता है?? क्यों समाज मे लड़का मन से जीता है लेकिन लड़की को मन के साथ तन से भी जीना पड़ता है?? दिल और दिमाग के मामले में हमेशा दिल की समझ को बेवकुफ क्यो माना जाता है?? मै तड़के ही पुछ बैठा तुम किसको मानती हो ?? वो बोली- अभी वहीं कर रही हूँ जो दिल कह रहा है, लेकिन दिमाग हमेशा डर पैदा करता है और इसिलिए कभी भी आपसे बात करने की हिम्मत नही कर पाती !!           
फिर एक दिन  मैसेज आया, ‘कौन, किसको, क्यों, ये सारे सवाल अपने-आप मे उलझे हुए है, इसकी तुलना व्यर्थ है –विवाद बेकार और निर्णय कठिन। पर मै आपसे बहुत प्यार करती हूँ, मन के किसी कोने में आपने एक तार छेड़ दिये है अब ये हर समय झनझना उठता है।‘
मै पढकर हैरान रह गया कि, ये मेरे अतीत का कोई हिस्सा है जो वर्तमान मे साया बनकर पीछा कर रही है। ( लेकिन यह खुबसूरत हवा के झोकें की तरह था जो मुझे अंदर तक भिंगों गया) मै हफ्तो तक उन पंक्तियों को बार-बार मन में दोहराता जा रहा था।

समय जाने किस करवट लेता है उसकी एक अंगराई सब कुछ एक झटके में तहस-नहस कर देता है और हम किंकर्त्व्य विमुढ होकर सिर्फ तमाशबीन !! कुछ रिश्ते रेत पर लिखे नामों की तरह होते है जिन्हे हवा का एक ही झोंका अपने साथ उड़ा ले जाता है पर उस रेत का एक-एक कण जिस दिशा मे जाता है वहाँ अपने रिश्ते की खुश्बू बिखेरता है।
  
आखिर एक दिन ऐसा भी आया जब मुझे वह शहर छोड़ना था। उस दिन मुझे ऐसा लग रहा था किसी सोनपरी के साथ खुले आसमान में विचरण करते हुए अचानक किसी ने पर काटकर  शिथिल शरीर को “कच्छ की खाड़ी” में तड़पने के लिए छोड़ दिया हो......!! जैसे-जैसे दिन नजदीक आने लगा मुझे कोई अदृशय शक्तियाँ अपने मोहपाश मे बाँधने लगा। जब भी आँखे मूँदकर यहाँ के बारे में सोचता हूँ तो जिसे सबसे अधिक मिस करूँगा उसमें सबसे पहला  नाम ‘LUCY’  की आती थी । 
  
मै यहाँ से जा रहा हूँ इसकी मुझे खुशी भी हुई पर अपने LUCY से बिछड़ने का दुख भी । मै अपने लिए तो चाहता था कि अभी यह शहर छोड़ कर चला जाऊ पर उसके लिए चाहता था कि कभी भी न जाऊ । मै जब सारा सामान गाड़ी मे रख दिया और निकल ही रहा ठीक उसी समय मुझे किसी की सुबकने की आवाज सुनाई दी..... !! अनायास ही मैने पलटकर देखा तो मुझे वो लड़की दिखी जो मेरे पड़ोस में रहती थी और जिसे स्कूल मे नाम लिखवाने से लेकर कॉलेज मे पास करवाने तक मे मेरा अहम योगदान था लेकिन वो.... इस तरह मेरे रास्ते में कभी आयेगी मैने सोचा ना था उसकी आँखो से टपकते आसुँओ की धार बहुत कुछ कह रही थी। अब चौकने की बारी मेरी थी.....!!   

मैने समझाने की नाकाम कोशिश करते हुए कहा कि, मैने तुम्हे हमेशा से एक खुशनुमा मिजाज की खिलखिलाकर हँसने वाली गुड़िया की तरह देखा है, मैने अगर कभी तुम्हारे मन के किसी कोने को छेड़ने की हिमाकत की तो उसके लिए मुझे माफ कर देना,  मेरे लिए अपने परिवार से मूँह मोड़ना असंभव है मै तुम्हे अच्छा लगता हूँ इसी अहसास के साथ पूरे जीवन भर LUCY की तरह चाहूँगा
          मेरे जाने के बाद हम तुम्हे हर तारें मे नजर आया करेंगे !
      तुम हर पल कोई दुआ माँग लेना और हम सिर्फ तुम्हारे लिए टुट जाया करेंगें !!        

उसकी रुलाई फूट गई, ‘तान छेड़ने के समय नही पता चला कि कभी ये तान किसी को झकझोड़ भी सकती है, जब मजाक में आपने कहा था कि, ‘चश्मा पहनने वाली लड़की को जीवन साथी मिलने मे कठिनाई होती है’ ? और उसके बाद से मैने चश्मा कि जगह लेंस लगाने लगा
पता चला थापर तब तक बहुत देर हो चूकी थी और अब अहसास हो गया है अपने रिश्ते और उसके प्रति अपने फर्ज का !!
आज भी मुझे उम्मीद है कि वह जहाँ कहीं भी है उसके अंदर दिल और दिमाग के बीच जंग में दिमाग की जीत होती होगी, पर मै अपने मोबाइल को उसी हसरत से देखता रहता हूँ कभी तो कही से फिर ‘बीप’ की आवाज आएगी..............!!  आज भी पूनम की रात को समुद्र में 'ज्वारभाटा'  जैसा कुछ आता है- सोचता हूँ – ‘चाँद’  को पूर्ण यौवन में देख समुद्र का तान छिड़ जाता होगा, ऐसे मे मुझे LUCY की याद आ जाती है -

(नोटः यह एक काल्पनिक कहानी है इस कहानी के किसी चरित्र से किसी भी जिंदा या मूर्दा व्यक्ति का कोई संबंध नही है। अगर ऐसा हुआ तो यह महज एक संयोग होगा)

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